क्या आपने भी महसूस किया है कि मोबाइल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ गई हैं?
पिछले दो सालों से जो कुछ मोबाइल मार्केट में हो रहा है, वो सच में चौंकाने वाला है। मैं जब तीन साल पहले 15 हजार में एक अच्छा फोन ले सकता था, आज उसी फीचर वाला फोन 22-23 हजार मांग रहा है।
शुरू में तो मैंने सोचा शायद कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, पर जब मैंने गहराई से पता लगाया तो असली कहानी कुछ और निकली।
आज मैं आपको वो सब बताऊंगा जो मैंने अपने एक्सपीरियंस से सीखा है। ये सिर्फ न्यूज़ की बातें नहीं, बल्कि वो हकीकत है जो सीधे आपकी जेब पर असर डालती है।
Chip Shortage की असली कहानी क्या है?
सबसे पहले ये समझ लेते हैं कि ये चिप शॉर्टेज आखिर है क्या चीज। मेरे एक दोस्त ने जो इलेक्ट्रॉनिक्स की पढ़ाई की है, उसने बहुत आसान शब्दों में समझाया।
असली वजहें क्या हैं – कोरोना के टाइम में सारी फैक्ट्रियां बंद हो गई थीं। चीन, ताइवान और साउथ कोरिया जहां ये चिप बनते हैं, वहां काम रुक गया था। जब दुनिया फिर से खुली तो मांग तो आसमान छू रही थी पर सप्लाई कम थी।
सिर्फ मोबाइल नहीं – ये समझना जरूरी है कि चिप सिर्फ फोन में ही नहीं, गाड़ियों में, लैपटॉप में, टीवी में, यहां तक कि वाशिंग मशीन में भी लगते हैं। सबको चिप चाहिए था और बनने वाले कम थे।
बनाना इतना आसान नहीं – एक चिप बनाने में महीनों लग जाते हैं। नई फैक्ट्री लगाने में तो सालों का टाइम चाहिए। तो एकदम से बढ़ी हुई मांग पूरी करना मुमकिन नहीं था।
मोबाइल कंपोनेंट की लागत कैसे बढ़ी?
अब आते हैं असली मुद्दे पर। जब चिप की कमी हुई तो सबसे पहले असर मोबाइल इंडस्ट्री पर पड़ा।
Processor की कीमत में उछाल
प्रोसेसर यानी फोन का दिमाग। Qualcomm Snapdragon और MediaTek जैसे प्रोसेसर की कीमत 30-40% तक बढ़ गई। मेरे एक जानकार ने बताया कि जो चिप पहले 15 डॉलर में मिलती थी, वो 22-23 डॉलर हो गई। ये सुनकर आपको लग सकता है कि सिर्फ 7-8 डॉलर का फर्क है, पर जब करोड़ों फोन बनते हैं तो ये फर्क बहुत बड़ा हो जाता है। और आखिर में ये कीमत हमें ही देनी पड़ती है।
Display की लागत भी बढ़ी
AMOLED और LCD डिस्प्ले बनाने में भी खास तरह के चिप और कंपोनेंट चाहिए होते हैं। Samsung और LG जो डिस्प्ले बनाते हैं, उन्होंने भी अपनी कीमतें बढ़ा दीं। मैंने खुद देखा कि जो फोन पहले अच्छी डिस्प्ले के साथ आता था, अब उसी प्राइस में कंपनियां कम क्वालिटी की डिस्प्ले देने लगीं।
Camera Sensor और दूसरे पार्ट्स
कैमरा सेंसर, रैम चिप, स्टोरेज चिप – सबकी कीमत एक साथ बढ़ गई। Sony जो ज्यादातर फोन के कैमरा सेंसर बनाता है, उसको भी अपने सप्लायर्स से महंगे दाम पर पार्ट्स मिल रहे थे।
मार्केट पर क्या असर पड़ा?
अब बात करते हैं कि हम जैसे आम लोगों पर क्या फर्क पड़ा।
कीमतें तो बढ़ीं ही
सबसे पहला और सीधा असर तो ये हुआ कि फोन की कीमतें 15-20% बढ़ गईं। जो फोन 20 हजार का मिलता था, वो 24-25 हजार हो गया। Budget फोन खरीदने वाले लोगों के लिए ये बड़ी समस्या बन गई।
मेरे पड़ोस में एक अंकल हैं जो रिटायर हो गए हैं। उन्होंने मुझे बताया कि वो 10 हजार में एक सिंपल फोन लेना चाहते थे, पर वो फीचर अब 13-14 हजार में मिल रहे हैं। उनकी पेंशन तो वही है, तो उन्हें अब सोचना पड़ रहा है।
फीचर में कटौती
कई कंपनियों ने एक और रास्ता निकाला। कीमत तो वही रखी पर फीचर घटा दिए। पहले जो फोन 128GB स्टोरेज के साथ आता था, अब 64GB में आने लगा। बैटरी की साइज कम कर दी गई।
ये बहुत चालाकी वाला तरीका है क्योंकि ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता। वो सोचते हैं कि कीमत तो वही है, पर असल में वो कम चीज ज्यादा दाम में ले रहे हैं।
लॉन्च में देरी
नए मॉडल लॉन्च होने में भी काफी देरी हुई। जो कंपनी साल में 4-5 मॉडल लॉन्च करती थी, उसने सिर्फ 2-3 लॉन्च किए। इसकी वजह साफ थी – पार्ट्स ही नहीं मिल रहे थे तो फोन कैसे बनाते।
पुराने मॉडल ज्यादा बिके
एक मजेदार बात मैंने नोटिस की। जब नए फोन महंगे हो गए तो लोगों ने पुराने मॉडल खरीदने शुरू कर दिए। जो फोन 6 महीने पहले लॉन्च हुआ था, वो ज्यादा बिकने लगा क्योंकि उसकी कीमत कम हो गई थी।
अलग-अलग कंपनियों पर असर
हर कंपनी पर ये संकट अलग तरह से असर डाला।
बड़ी कंपनियां थोड़ी बच गईं
Samsung, Apple जैसी बड़ी कंपनियों ने पहले से ही चिप्स का स्टॉक कर लिया था। उनके पास पैसा भी ज्यादा था तो वो महंगे दाम पर भी पार्ट्स खरीद सकते थे।
Apple ने तो सीधे TSMC से डील कर ली। TSMC दुनिया की सबसे बड़ी चिप बनाने वाली कंपनी है। तो iPhone की सप्लाई पर कम असर पड़ा, हालांकि कीमत बढ़ ही गई।
छोटी कंपनियों की मुश्किल
Realme, Poco जैसे नए ब्रांड को बहुत मुश्किल हुई। उनके पास ना तो उतना पैसा था, ना ही पहले से कोई बड़ी डील थी। कई बार उनके फोन लॉन्च तो हो गए पर स्टॉक में नहीं आए।
मुझे याद है पिछले साल Poco का एक फोन लॉन्च हुआ था जो बहुत पॉपुलर था। पर महीनों तक out of stock रहा। लोग खरीदना चाहते थे पर मिल ही नहीं रहा था।
भारतीय ब्रांड्स का हाल
Micromax, Lava जैसे देसी ब्रांड को भी काफी नुकसान हुआ। वो तो वैसे ही Chinese ब्रांड्स से पिछड़ रहे थे, और चिप शॉर्टेज ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दीं।
आम आदमी क्या करे?
अब सवाल ये है कि हम जैसे लोग जो फोन खरीदना चाहते हैं, उन्हें क्या करना चाहिए।
जल्दबाजी से बचें
मेरा पहला सुझाव तो ये है कि अगर आपका फोन चल रहा है तो थोड़ा इंतजार करें। धीरे-धीरे हालात सुधर रहे हैं। चिप की सप्लाई बढ़ रही है और कीमतें भी नॉर्मल होने लगी हैं।
मैंने खुद 6 महीने इंतजार किया था। जो फोन जनवरी में 28 हजार का था, वो जून में 24 हजार में मिल गया। बस थोड़ा सब्र चाहिए।
पुराने मॉडल देखें
नए मॉडल की जगह पिछले साल के टॉप मॉडल देखें। वो अब सस्ते हो गए हैं और फीचर भी काफी अच्छे हैं। मेरी बहन ने यही किया। नया मॉडल छोड़कर 8 महीने पुराना फ्लैगशिप मॉडल लिया और 12 हजार बचा लिए।
Refurbished फोन का ऑप्शन
अगर बजट टाइट है तो refurbished यानी दोबारा तैयार किए गए फोन भी देख सकते हैं। Amazon और Flipkart दोनों ये सर्विस देते हैं। फोन चेक करके दिया जाता है और वारंटी भी मिलती है।
हालांकि मैं खुद इसका फैन नहीं हूं, पर अगर किसी की जरूरत है तो ये भी एक रास्ता है।
Offer का फायदा उठाएं
सेल के टाइम पर नजर रखें। दीवाली, न्यू ईयर, Republic Day जैसे मौकों पर अच्छे डिस्काउंट मिलते हैं। बैंक ऑफर और एक्सचेंज ऑफर भी काम आ सकते हैं।
भविष्य में क्या होने वाला है?
मेरी रिसर्च और जो मैंने समझा है उसके हिसाब से अगले एक साल में चीजें बेहतर होंगी।
चिप की सप्लाई बढ़ रही है
कई नई फैक्ट्रियां लग रही हैं। TSMC ने अमेरिका में, Samsung ने यूरोप में नए प्लांट लगाए हैं। भारत में भी सेमीकंडक्टर बनाने की योजना चल रही है।
इससे अगले 2-3 सालों में चिप की कमी काफी कम हो जाएगी। मांग और सप्लाई का संतुलन बनेगा तो कीमतें भी नॉर्मल होंगी।
टेक्नोलॉजी में बदलाव
कंपनियां अब ऐसे चिप बनाने की कोशिश कर रही हैं जो कम पावर खाएं और सस्ते हों। 3nm और 5nm टेक्नोलॉजी आ रही है जो ज्यादा एफिशिएंट है।
भारत का प्लान
भारत सरकार भी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस कर रही है। PLI स्कीम के तहत कई कंपनियों को प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। अगर ये सफल होता है तो भारत में बने चिप से फोन सस्ते हो सकते हैं। हालांकि इसमें अभी 5-7 साल लगेंगे।
मेरी आखिरी राय
यारों, ये जो संकट आया था वो सिखाने के लिए काफी था। हमने देखा कि पूरी दुनिया कितनी आपस में जुड़ी हुई है। एक जगह फैक्ट्री बंद हुई तो हजारों किलोमीटर दूर हमारी जेब पर असर पड़ा। मोबाइल अब सिर्फ फोन नहीं रहा, ये हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है। इसलिए जो कुछ भी इस इंडस्ट्री में होता है, वो हम सबको छूता है। अच्छी बात ये है कि हालात सुधर रहे हैं। धीरे-धीरे सब नॉर्मल हो रहा है। बस हमें थोड़ा धैर्य रखना होगा और स्मार्ट फैसले लेने होंगे।
अगर आप फोन खरीद रहे हैं तो जल्दबाजी ना करें। थोड़ा रिसर्च करें, कीमतें कंपेयर करें, और तभी खरीदें जब आपको लगे कि अच्छी डील मिल रही है। और हां, अगर कोई सवाल हो तो बेझिझक पूछें। मैं अपने एक्सपीरियंस से आपकी हेल्प जरूर करूंगा।